| धीरेन्द्र अस्थाना। ये भी एक दुकान है। भारत की पहचान है। भूख का इम्तिहान है और मेरा भारत महान है। हां, चौंकिए मत, शहर की ऐतिहासिक इमारतों पर भीख मांगने का धंधा पूरे शवाब पर है। इन बच्चों को भीख मंगवाने के लिए बाकायदा सौ रुपये रोज पर किराए पर लाया जाता है। किराए के ये भिखमंगे बच्चे अपने इमोशन्स के दम पर धंधा तो कर लेते हैं, मगर पर्यटन नगरी का नाम जरूर गंदा कर देते हैं। यही तो है मेरे अतुल्य भारत की असली तस्वीर! आगरा किला हो या ताजमहल। इन जगहों पर छोटे-छोटे बच्चों को भीख मांगते देखा जा सकता है। इन बच्चों के निशाने पर विदेशी पर्यटक होते हैं। महज पांच-छह साल की उम्र के ये बच्चे अपने साथ गोद में एक और छोटा बच्चा लिये रहते हैं, जिससे विदेशी पर्यटकों को इमोशनली ब्लैकमेल किया जा सके। सूत्रों के मुताबिक, मूवी ट्रैफिक सिग्नल की तरह से ही इस शहर में भी भीख मांगने का धंधा चल रहा है। इन बच्चों को सौ रुपये प्रतिदिन के किराये पर लाया जाता है। भीख मांगने के इस धंधे में उतारने से पहले इन्हें बाकायदा ट्रेनिंग भी दी जाती है। जिससे ये विदेशी पर्यटकों को अच्छी तरह से पिघला सकें। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, इन बच्चों के साथ दिनभर इनका एक आका भी रहता है, जो पुलिस के साथ पूरी साठ-गांठ करके रखता है। पुलिस की मुट्ठी में जैसे ही चंद नोटों की गर्मी आती है, वह भी इन भिखमंगे बच्चों की तरफ से अपनी नजरें फिरा लेते हैं। बस इसके बाद भीख मांगने की ये दुकान पूरी रफ्तार से दिनभर के लिए दौड़ पड़ती है। गाड़ियों से विदेशी पर्यटकों के उतरते ही उन्हें इन बच्चों द्वारा घेर लिया जाता है। इतना ही नहीं, कई बार तो इन बच्चों की वजह से विदेशी पर्यटक झल्ला तक जाते हैं, मगर, पुलिस को पर्यटकों की यह परेशानी दिखाई नहीं देती। हालांकि पुलिस के पूर्व आलाधिकारी ने इन बच्चों को हटाने की कवायद की थी, मगर मौजूदा समय में इन बच्चों का गैंग एक बार फिर से ऐतिहासिक इमारतों के आसपास सक्रिय हो उठा है। |
आप मुझ तक किसी तरह की कोई भी खबर पहुचाना चाहते हो तो कृपया इस मोबाइल पर संपर्क करे 9415001924 और मेल करने के लिए dheerendraasthana@gmail.com
Sunday, April 29, 2012
भीख की मोबाइल दुकान, अतुल्य भारत की पहचान
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment